Friday, March 15, 2013

समय की पुकार

ओ द्रुत वेगमयी गंगा .....
किससे  मिलने जा रही हो ?
बिना रुके तुम मस्ती में
क्यों इतना इठला रही हो ?

आगे बढ़कर पीछे आती
हुलस-हुलस  जाने क्या गाती
स्वच्छ मनोहर झागों में बंटकर
शीतलता बिखरा रही हो,....

कौन छूट गया पीछे तेरा ?
जिसको लेने जा रही हो ?
ओ फेनिल धारों वाली गंगा
किससे  मिलने जा रही हो ?



आगे बढती कभी न रूकती
मस्ती में तुम कभी न थकती
आगे बढ़ना ,पीछे मुड़ना
सबको साथ लिए हीं चलना .....



बिना बोले ,बिना शोर किये हीं
 मूलमंत्र ....सिखला रही हो ....
ओ ..द्रुत  वेगमयी गंगा ....
किससे मिलने जा रही हो ?

सोचो  ! क्या ...?
सागर हीं तेरा सत्य है ?
तेरे जीवन का औचित्य है ?


तेरा सत्य तुम्हें पुकार रहा है ....
तुन्हें ...तुम्हारी राह  बता रहा है
बनोगी गर तुम .....

किसी भीड़ का हिस्सा ?
कैसे रच पाओगी बहना ..
खुद का कोई किस्सा ?


सागर में मिलते हीं तेरा
स्वरुप ....खो जाएगा
तेरा तुझमें कुछ न रहेगा
सब खारा हो जाएगा
जिस दिन मिलन तुम्हारा आली ..
सागर से हो जाएगा .....

चंद  खुशियों की खातिर
छोड़ों सागर से मिलने की आस
तुमको अब गढ़ना ही होगा
एक नया इतिहास .....



समय की पुकार यही है
संकल्प तुम्हें अब करना होगा
तोड़ के सारी बाधाओं को
तुम को आगे बढ़ना होगा ....
तुमको  आगे बढ़ना हीं  होगा .......












16 comments:

  1. bahut sundar rachna nisha ji lekin ganga ko bhi prakriti ke niyam ka paalan karna hota hai jaise ham nariyan karti hai

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    1. kuch niyam siraf todne ke liye bane hote hain sandhya jee...ganga to ak pratik matra hai ....apna samman bnaye rakhne ke liye hamen kai bar gahraai men jana hota hai ..yahan main kuch aur kahna chahti hoon .....try to understand .....ak aurat hone ke naate main ...hmesha apne parivar ko pratham isthan deti hoon ....pati bacche pahle ...
      aage badhna hai to sbko sath lekar chalna jaruri hai .....

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  2. सुंदर प्रस्तुति..

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  3. बहुत ही सुन्दर सार्थक प्रस्तुति,सादर आभार.

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  4. आगे बढती कभी न रूकती
    मस्ती में तुम कभी न थकती
    आगे बढ़ना ,पीछे मुड़ना
    सबको साथ लिए हीं चलना .....

    प्रेरणादायी सीख देती सुन्दर रचना
    सादर !

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  5. यह आवश्यक है ...
    शुभकामनायें !

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  6. सागर में मिलते हीं तेरा
    स्वरुप ....खो जाएगा
    तेरा तुझमें कुछ न रहेगा
    सब खारा हो जाएगा
    जिस दिन मिलन तुम्हारा आली ..
    सागर से हो जाएगा .....

    यही तो जीवन की अंतिम परिणिती है, इसी परिणिती से जीवन धन्य होता है, बहुत ही सुंदर और प्रेरणास्पद रचना.

    रामराम

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  7. चंद खुशियों की खातिर
    छोड़ों सागर से मिलने की आस
    तुमको अब गढ़ना ही होगा
    एक नया इतिहास .....



    समय की पुकार यही है
    संकल्प तुम्हें अब करना होगा
    तोड़ के सारी बाधाओं को
    तुम को आगे बढ़ना होगा ....
    तुमको आगे बढ़ना हीं होगा .......

    सत्य का साक्षात्कार कराती रचना

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  8. चंद खुशियों की खातिर
    छोड़ों सागर से मिलने की आस
    तुमको अब गढ़ना ही होगा
    एक नया इतिहास .....

    काश ऐसा हो सके. सुंदर सोच, सुंदर लेखन.

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    1. aasan kam to nahi hai .....bahut mushkil hai ......par asambhaw bhi nahi .....

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  9. बहुत ही सुन्दर रचना...
    http://theparulsworld.blogspot.in/

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  10. सागर में मिलते हीं तेरा
    स्वरुप ....खो जाएगा
    तेरा तुझमें कुछ न रहेगा
    सब खारा हो जाएगा
    जिस दिन मिलन तुम्हारा आली ..
    सागर से हो जाएगा .....

    गंगा कहे कहे रे धारा .....तुझको चलना होगा ,जीवन चलने का नाम ,चलना तुझे सुबह शाम .....

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  11. सागर से मिलना ही आत्मा से पर्मातना का मिलन है ...

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