Monday, December 31, 2012

जिन्दगी

जिन्दगी कदम-कदम पर सीख है 
कुदरत द्वारा दिया गया इक भीख है .......
            इसका उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए क्योंकि ....

 जानेवाले तो चले जाते हैं पर जो उनके पीछे रह जाते हैं वो ....पल-पल 
मरते हैं। बड़ी कठिन परीक्षा की घडी होती है ये जिसे शब्दों में व्यक्त करना 
मुश्किल है .....जाना तो सभी को है लेकिन समय के पहले जानेवालों की कमी 
बहुत अखरती है .....

Saturday, November 17, 2012

हे छठी मैया

बहुत मेहनत कर
बाग़ के माली और मालिन ने
अपने बगिया के पौधों की
की थी रखवाली .........
लम्बे इन्तजार के बाद ....
उसकी  बगिया में कलियाँ ..
खिलखिलाई थी .....पर ....
पता नहीं कैसे,.......
विधंसी तूफान की नज़र ...
मालिन के खुशियों पर
पड़ गई ...
और ....मालिन उसके
झंझावातों में उलझ गई ....

हे छठी मैया ....अपनी ..
दृढ प्रतिज्ञ भक्तन से जाकर कहो ......
बाग़ के सारे सदस्य  बेचैन है उसके बिना ...
तुम जीवन  शक्ति बनकर बहो .... 

सभी नतमस्तक हैं
उसकी जिद के आगे
बहुत देर हो गई .....
मेरी दीदी को कह दो ...
कब से सुबह  हो गई ...
अब तो  तुम जागो ....

हे छठी मैया .....
अगली छठ में
मैं भी तेरे पास आउंगी ......
मेरी दीदी को जगा दो ...
तुम्हे श्रद्धा के अर्घ चढ़ाऊँगी
तुम्हारी शक्ति से संवरते हैं ...
भक्तों के बिगड़े काज ....
विनती है ...छठी मैया ..
सुनो अर्ज हमारी आज,....
सुनो अर्ज हमारी आज .....
                                  ब्लोगर साथियों ....आप भी मेरी दीदी के लिए दुआ कीजिये ....की  वो जल्द ही स्वस्थ्य  हो जाए ....

Friday, November 9, 2012

साथ हमारा

एक तिनके के सहारे
डूबनेवाला तट पर आ जाता है
मंद समीर का झोंका भी ..
जीने का सहारा बन जाता है .....
 
खुद पर विश्वास किया जिसने ...
मंजिलें उसी ने पाई है
राह की बाधाएं भी भला कभी ...
जीतनेवाले को रोक पाई है ?
 
मोती चाहिए तुम्हे अगर तो ?
जलधि में समाना  होगा
अंधियारे को दूर कर सको
वो बाती  बनकर जलना होगा .....
 
प्रथम परिचय को भूल न पाए
इसके लिए अहर्निश
,साथी ....  तुमको ...चलना होगा ....
साथी  तुमको चलना ही होगा ....
 
सूरज चलता
चंदा चलता
चलता है .....
जग सारा ....
 
छोटी सी इस जिन्दगी में .....
रहे सदा साथ हमारा ... ..........दिवाली की बहुत -बहुत शुभकामनाएं ......

Friday, November 2, 2012

मेरा चाँद

मन की जमीं पे
खुशियों के फूल खिलते हैं
निशा  -पति जैसे चाँद जब .....
हरेक पत्नी को मिलते हैं .....

नभ में चमकनेवाले ...
.हे करवाचौथ के चाँद
सुहाग पर्व के इस ..
पावन अवसर पर मैं ....
तुम्हे सच्चे दिल से
पूजती हूँ ....
रहूँ सदा सुहागन .......
यही तुमसे वरदान
मांगती हूँ ........



जैसे,...... तेरी चांदनी
निशा के सारे    तम
 हर लेती है,.....
प्यार  के खुमारी से उसके
आँचल को भर देती है ...वैसे ही ....
मेरे चाँद को भी कुछ तरकीब बता दो
प्रिया को खुश रखने के ?????????
सारे ,......     गुप्त रहस्य बतला दो ........



देखा है ...मैंने
जीवन के सफर में
मुझपर आई हर मुसीबत के क्षण में .....
मेरे चाँद की आँखें होती है ...नम ....
मेरा चाँद ..किसी भी मामले में ...
नहीं है तुमसे कम ......



जानती हूँ मैं ...
संगीत में राग होता है
सूरज में आग होता है
और तो और ?
सुन्दरता की मिसाल हो तुम .....पर,.....
तुममें भी दाग होता है तो भला ?
मेरा चाँद बेदाग़ कैसे हो सकता है ?
यही सोच मैंने अपने चाँद की हर ..
अच्छाई और बुराई को तहेदिल से अपनाया है ...
उनके साथ प्यारा सा जहाँ बसाया है ....



तुम्हारी चांदनी की तरह
चमके ..समय के साथ ..
समायोजन और प्यार  हमारा 
करती यही कोशिश
पूरी हो हर सुहागन की
ये तमन्ना ......
देना यही आशीष .....


Monday, October 29, 2012

ओ शरद के चाँद

 
ओ शरद के चाँद
तुझ में खोकर
आज तन्हाई भी मौन है
बता दे मुझको ......
हंसती हुई चांदनी की ...
उदासी का सबब कौन है ?
 

Tuesday, October 23, 2012

ऐ दिल गुनगुनाता चल ..

 
ऐ दिल गुनगुनाता चल
गीत ख़ुशी के गाता चल

कल क्या होगा ?
कभी न सोचो
अभी का साथ निभाता चल ....

ऐ दिल गुनगुनाता चल ...
गीत ख़ुशी के गाता चल

आनेवाले आयेंगे
जानेवाले जायेंगे
जिसको इन्तजार है तेरा
उसको तू अपनाता चल

ऐ दिल गुनगुनाता चल
गीत ख़ुशी के गाता चल ....


जहां बिछी हों
कनक-रश्मियाँ
जहां खिली हों
कागज की कलियाँ
गुंजन करते हों
जहाँ पर ...
भमरें संग
बहुरंगी तितलियाँ
उनसे नज़र बचाता चल

ऐ दिल गुनगुनाता चल
गीत ख़ुशी के गाता चल ...

मोती पाना है गर तो ?
साहिल को ठुकराता चल
गम ना कर तूं
गहराई से ....
सागर में उतराता चल

ऐ दिल गुनगुनाता चल
गीत ख़ुशी के गाता चल ...

जिसने जख्म दिए हैं तुमको
उनको भी सहलाता चल ..
धीरे-धीरे दुखी ह्रदय को
खुद से ही बहलाता चल
चलना अकेली है
नियति निशा की
उसको भी समझाता चल ....

ऐ दिल गुनगुनाता चल
गीत ख़ुशी के गाता चल ...

Friday, October 12, 2012

माँ !मुझको नहीं मारो

   
साजिश सुन घरवालों की
अजन्मी बिटिया करे गुहार
मत मारो मुझे वक्त से पहले 
सुन लो मेरी पुकार ......
 
 
ताना सुनकर भी माँ मुझको
खुद से जुदा न करना
जमीं तुम मेरी बनना  मैं ...
आसमान बन जाउंगी
लू के थपेड़ों में मैं ....
बदली बन छा जाउंगी ...
बेदर्द इंसानों की बातों पर
मत देना तुम ध्यान
वादा करती हूँ ..
बनूँगी तेरी ही पहचान .....
 
जिस बेटे की आस में
करोगी ऐसे निर्मम कर्म
वही बेटे  अपनी ख़ुशी के  खातिर
भेजेंगे तुम्हें वृद्धाश्रम ....
 
माँ काली ,माँ दुर्गा है
माँ शक्ति की शक्ति
आंच आये बिटिया पर तो ......
माँ कुछ भी कर सकती है .....
 
किसी की बातों से
तुम मत होना लाचार
तेरे सारे  सपनों को माँ ..
करुँगी मैं साकार ....
 
मत भूलो मैं भी हूँ
तेरे शरीर का ही अंश
मुझसे भी आगे बढेगा ..
प्यारा तेरा वंश ....
 
जो भी करना हो माँ कर लो ...
हिम्मत नहीं हारो
चहकने दो अपनी गोद में
माँ ....मुझको नहीं मारो ......
माँ ....मुझको नहीं मारो ...
 

Friday, October 5, 2012

वक्त -वक्त की बात

वक्त -वक्त की बात है
कोई मुस्कुराता है
आसमां  पे जब भी
चाँद नज़र आता है .......

Tuesday, September 25, 2012

तुम कहते हो !

याद उसे करते हैं
जिसे भूल जाते हैं
मिलना उससे पड़ता है
जिससे दूर होते हैं
तुम तो मेरे दिल की
धड़कन में रहते हो ........
भूल गई मै तुमको
ये तुम कहते हो ????

Sunday, September 23, 2012

तेरी परछाईं भी

ऐ मन !
गम नहीं करना
न हीं ठंडी आहें भरना
भ्रम को सत्य समझने की कभी
कोशिश भी न करना
गम उसके लिए करना
जो गम हरना जानता हो
क़द्र उसकी करना
जो क़द्र करना जानता हो
साथी तो सभी चाहते हैं पर ....
संग उसी के चलना जो
सच और झूठ में
सही और गलत में
छल और विश्वास में
अंतर करना जानता हो...
पल-पल में विचार बदलनेवाले
दूसरों के इशारों पर नाचनेवाले  
कभी भी धोखा दे जायेंगे
बिना किसी अपराधबोध के जी सको
बना लो ऐसा दिल का हरेक कोना
किसी संगदिल इंसान के आगे कभी
मायूस नहीं होना ....
क्या पता कब ? कहाँ ? कैसे ?
अपने  फायदे के लिए
वो कर ले तुझको अपने आगे
खुद को इतना मजबूत बना कि
तेरी परछाईं भी तुझसे भागे .....

Monday, September 17, 2012

क्षणिकाएं

स्वार्थ भरे रिश्ते
यूँ ही टूटते
मन अधीर न हो ....


अंतरात्मा की आवाज
मन का विस्तार
है सृजन का संसार ....


बेचैन मन
स्वप्निल संसार
ऊर्जा का भंडार ..

अदृश्य ताकत
समय की पुकार
सृजन -संसार ...

जब हद पार हो जाए तो ?
दर्द दवा बन जाती है
इन्हीं दवाओं के सहारे
जिन्दगी कट जाती है ...

वक्त ने ली अंगराई
बचपन के दिन याद आये
फलक पे जब भी सितारे नज़र आये .....

छीना है वक्त ने
मेरी माँ को मुझसे
वक्त ने ही माँ भी बनाया है मुझको ...

Wednesday, September 12, 2012

प्रेम

प्रेम लेने नहीं
देने का नाम है
एक कोमल मृदु
एहसास  और जज्बात है
प्रेमी मित्र बन जाता है जब
प्रेम आत्मिक हो जाता है तब
ऐसे प्रेम के लिए कोई रो नहीं सकता
लाख कोशिश करे जमाना
ये खो नहीं सकता ........

Friday, August 31, 2012

दिल के रिश्ते

दिल के रिश्ते ........
अनजाने ही जुड़ जाते हैं
खिलना हो फूलों को तो ?????
वो वीरानों में भी खिल जातें हैं
फूल बनना है तो बनो कमल का
जलकुम्भी का नहीं .....
कमल के फूलों से
जल और तालाब की
शोभा बढ़ जाती है
जलकुम्भी के फूलों से
जल और तालाब की
पहचान ही मिट जाती है ....

Saturday, August 11, 2012

वक्त

वक्त के साथ बदलना मैंने सीखा  नहीं
ऐसा नादाँ इन्सान मैंने देखा नहीं .....

वक्त मुझे तुम सताओगे क्या ???????
सजा खुद को दिया मैंने तुम कर  पाओगे क्या??????


 वक्त से सीखा भूलना मुश्किल भरे दिन ....
जीना मैंने सीख लिया  साथी तेरे बिन

वक्त से दोस्ती बालू की भीत
अनजानी  सी राहें पगली सी प्रीत

वक्त के साथ मजबूत होती रही.....
निशा ढलती रही  शमा जलती रही .....

 

Thursday, July 19, 2012

विजेता

बेचैनी ,तनाव ,घबराहट
सृजन -पीड़ा की जान होती है
नया कुछ मिलनेवाला है
इसकी पहचान होती है
ख़ुशी-ख़ुशी जो इन्हें झेल लेता है
आनेवाले पल का वही विजेता कहलाता है .....

Monday, July 9, 2012

Thursday, July 5, 2012

क्षणिकाएं


           ( 1)

छोटी सी इक बात पे
रोती हुई आँखें
हँसने लगी ....
      
       (2)
बाबुल का अँगना
महकते रहना 
दुआ करती हूँ ....

    (3)
दिल की दहलीज
सूनी है
कब आओगे ?
   (4)
सुख़ गई
शादाब बेलें
बारिश की अधिकता से ...

   (5)

सुनाया जो दुःख अपना
साँझ ने निशा से
वो शबनम के आँसू
रोती रही .....



(शादाब -हरी -भरी )
.

Sunday, June 17, 2012

लहरें और चट्टान

ब्लागर साथियों आइए  आज  आपको मै अपनी नई कल्पना से मिलवाती हूँ ......मुर्गा पुराण से मुक्ति
दिलवाती हूँ .....बताइएगा  कैसी लगी मेरी नई कल्पना एवम रचना .......




नदी की लहरों और चट्टान में
बहुत अच्छी बनती थी .....
बात-बेबात बिना वजह ठनती थी
शायद ये लगाव का ही एक रूप था
लहरें खिलखिलाती थी ,
इतराती -इठलाती थी ...
मालूम नही था चट्टान को
ये उसकी आदत थी ....



अचानक चट्टान के मन में
आ गया अहंकार ....
अहम् ब्रह्म अस्मि के मद में आकर
करती रही  लहरों का तिरस्कार
अपनी धुन में मस्त लहरों को
ये बात समझ में नहीं आई
एक दिन ....जब वो चट्टान के पास आकर खिलखिलाई .
चट्टान ने उसको अपनी आँखें दिखलाई औ ...
निर्दई  भाव से चिल्लाई
राह की तेरे बाधाओं को दूर करती हूँ ....
तुझे क्या पता कि  खुश रहने के लिए मै तेरे
क्या -क्या सहन करती हूँ ???????
सुनकर उसकी बातें
लहरों का दिल टूट गया
जिसे सच्चा साथी समझती थी ?????
उसका साथ उसी पल से छूट गया .............


आज भी उसके जीवन में ....
सच्चे साथी की कमी है
सच्चे साथी की कमी से
उसकी आँखों में नमी है......




सच तो यही है कि ....
सच्चा साथी मिलना किस्मत की बात होती है
उसके अभाव में ही शायद ......
निशा शबनम के आंसू रोती है ...
कोयल  कुहूकती है
पपीहा पीऊ -पीऊ पुकारता है
मोर नाचते समय भी रोता है ........



ऐ ...मन ........दु:खी मत हो ...
ऐसा   बहुतों के साथ होता है .....





छोड़ दोस्ती चट्टान की
लहरें अभी भी खिलखिलाती है ...
चट्टान जहाँ खड़ी थी
वहीं खड़ी है ....
लहरें अनवरत आगे बढती जाती है ...
आगे बढती जाती है .....





Monday, April 9, 2012

मुर्गा बोला (6)

मुर्गा बोला ........
कुकड़ू  कूँ
हो गई गलती अनजाने में
कृपाकर माफ़ कर दो तुम ..........
वादा करता हूँ मै तुमसे
जिन बातों से दिल दुखता है तेरा
वो बात नही दुहराऊंगा
माँ ,बहन या भाभी हो मेरी ...
किसी के बहकावे में नही आऊंगा .......
जब से तूने घर छोड़ा है
तब से घर में दीपक नही हँसता
रसोई और पूजाघर की ज्योति भी
तेरे बिन जैसे सो रही है .....
बिना तुम्हारे ऐसा लगता ............
घर की डेहरी रो रही है .........



कौन है अपना ????/
कौन पराया ????/
सबकी नीयत जान गया  हूँ
अहमियत क्या है तेरी मेरे जीवन में .........
इसे अच्छी तरह पहचान गया हूँ ......
छोटी सी इक भूल से मेरी
दर दर भटक रहा है चूजा मेरा बेचारा .....
मुर्गी रानी मान भी जाओ
तुम बिन मेरा कौन सहारा ????????







मुर्गी बोली .....
जानती हूँ  .....
एक का धेर्य दुसरे का गुस्सा
दाम्पत्य जीवन को मजबूत बनता है .....
पर मौन जब मुखरित होता है तो ???????
काबू में कहाँ रह पाता है ???///
कब तक ?बोलो...... कबतक ?
तुम्हारे अत्याचार को मै सहती ?
नदी बिना किनारे की बन .....
कब तक यूं ही बहती ??????
बेशक .....माँ बाप के श्रवण कुमार बनो ....
बहना के बनो प्यारे भैया ....
भाभी के देवर ......
क्यों भूल जाते हो क़ि....
हो तुम मेरे भी जेवर ......



अर्धांगनी हूँ तुम्हारी
कैसे रह सकते मुझसे दूर ?????
मेरी मांग के सितारे ...
तुम हो मेरे सिन्दूर .......



दुःख देनेवाले करके काम
कैसे बनोगे तुम मेरे राम ?????

चूजों को साथ लिए मै
दर दर कैसे भटकती हूँ .......
कैसे कहूँ उन बातों को
जिनको कह फटती है मेरी छाती ....
यादें मेरे घर क़ी दिन रात है सताती ....


तुमसे और चूजों से ही तो ????????
महकता था घर संसार हमारा ...
मुर्गे राजा !मुझको चाहिए ..
केवल और केवल साथ तुम्हारा ......

Sunday, March 18, 2012

मुर्गा बोला (भाग -५)

मुर्गा बोला -कुकड़ू कूं
आ नहीं पाया होली में
नाराज तुम होती हो क्यूँ ?


जानता हूँ .........
फागुनी बयार ने ...
भौरों के गुंजार ने ...
पलाश के दहकते श्रृगार ने ....
वसंत दूत की मीठी कूक ने ...
मेरे वियोग में ,दिल में उठी हूक ने ....
तुम्हे  जी भरतडपाया होगा ..........


पिछली होली की यादों ने
मेरे द्वारा किये गये वादों ने
तेरा दिल बहुत दुखाया होगा पर ........?
याद रखो जीवन में चाही गई कई इच्छाएं .......
नहीं हो पाती हैं पूरी
जीवनसाथी हो मेरी
समझो मेरी मज़बूरी .



इंतजार करो मिलन के
स्वर्णिम क्षणों का जब ....
करूंगा हर कमी क़ी भरपाई
उत्साह औ उमंग के रंग से
रंगेगा खुशियों भरा संसार हमारा
मुर्गी रानी मान भी जाओ
तुम बिन मेरा कौन सहारा ?






मुर्गी बोली .........
नाराज नही हूँ मै......
मेरे दुःख  को समझो यार
एक दूजे के गम को हर ले
इसे कहते हैं प्यार .......



फूलों पर मंडरा रही है
तितलियाँ हौले -हौले
कोयल ,मोर .पपीहा बोले
भेद प्रणय के सभी हैं खोले
मदनोत्सव (होली ) के रंगीन माहौल में
चैन नही यहाँ ......
विरहाग्नि से दग्ध उर से
आवाज आ रही .......
मोरे पिया तूं कहाँ ?



तो क्या हुआ ?
तुम बिन गुजरी मेरी होली ....
यादें थी पिछली होली क़ी
थी नही मै अकेली ......

विश्वास औ प्यार भरा साथ हो गर ...?
जीवनसाथी का तो ????????/
हर दिन होली और हर रात दिवाली होती है
तन- मन प्यार के रंग रंगे
यही  तो जीवन क़ी ज्योति है .....

जीवनसाथी का साथ है ऐसे जैसे
नदी औ किनारा
मुर्गे राजा ! मुझको चाहिए
केवल औ केवल साथ तुम्हारा .......




मुर्गे -मुर्गी के संवाद ने अगर आपको थोड़ी सी भी खुशियाँ दी हो तो
कृपया अपने विचार अवश्य लिखें .भले मेरे साथ न्याय न करें पर अपने
साथ अन्याय क्यों ???????///धन्यवाद गुप्त दोस्त ..

Monday, February 13, 2012

मुर्गा बोला (भाग-४)

ब्लौगर साथीओं आज  मुर्गा -मुर्गी के वियोग व प्रेम की व्यथा का आनंद लीजिये ........
मुर्गा बोला..........
कुकड़ू  कु .......
 मेरी हमसफर .....मेरी हमदम ......
कहाँ हो तुम?????????????......
मुद्दतें गुजर गईं 
तुम नहीं आईं.....
कैसे बताउं तेरे बिन ....
डंसती है ये तन्हाई .

आओगी .....तुम .....ये सोचकर ....
तन्हा यहीं  खड़ा हूँ ....
जिस मोड़ पे मुझे छोड़ गईं थीं ?
बेबस वहीं पड़ा हूँ ......

जिउं......? वो भी तुम बिन ...? नहीं .........
मेरे दिल को नही गवारा ........
मुर्गी रानी मान भी जाओ ....
तुम बिन मेरा कौन सहारा ?

मुर्गी बोली ......
मुद्दतें गुजर गईं 
तुम्हें  भूल नही पाई.......
वियोग की अग्नि को ...
दहका गई पुरवाई .

कैसे जिउं तुम बिन ?
तुम बिन कैसे मै गाऊ ?
पांव पड़ी जंजीर है मेरे ....
कैसे मिलने आऊं....?

भौरा  गुंजन करता था ......
कलियाँ खिलखिलाती थी ....
तितली बनकर  जब-जब मै ....
उपवन में लहराती थी .

हाय ! ये क्या हो गया .....?
कैसे हो गया .......?
फूल झड गये सारे!
उस निर्दय पतझड़ के आगे ......
लूट गईं बहारें......!

 नहीं रोक सकेंगे मुझको ......
करे लाख जतन जग सारा ....
मुर्गे राजा ....मुझको चाहिए 
केवल औ केवल साथ तुम्हारा ....




Sunday, January 8, 2012

मुर्गा बोला -(भाग- 3)

मुर्गा बोला कुकड़ू कू.........
क्या कमाता हूँ ?कहाँ जाता हूँ ?
पूछनेवाली कौन होती है तूँ ?
बाती जल जाती है ....
.रह जाता है सिर्फ दीया........
खुद से पूछकर देखो ?
तेरी औकात है क्या ?

अपनी मर्जी का मालिक हूँ ....
हूँ नही गुलाम तुम्हारा ......
कभी नहीं सुन पाओगी मुझसे ......
तुम बिन मेरा कौन सहारा ?


मुर्गी बोली ........
मै कौन हूँ ?
औकात है मेरी क्या ?
मै हूँ एक बाती ....
तुम एक निर्दय दीया ......
सहधर्मिणी हूँ तुम्हारी
अपनी औकात मै बतलाउंगी
भटक गए हो रास्ते से .....
सही राह मै दिखलाउंगी  ....
घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरंक्षण अधिनियम २००५ औ
४९८अ का प्रभाव तुम पर आज्माउन्गी ???????????????

निर्दय होकर मै भी तुमको ..................
जेल की चक्की पिस्वाउंगी
कष्ट में तुम्हे देखकर भी
नहीं पिघलेगा दिल मेरा बेचारा
भूले से भी नही सोचना
कहूंगी तुमसे मै ........

मुर्गे राजा......मुझको चाहिए .....
केवल औ केवल साथ तुम्हारा .......