Monday, April 3, 2017

कहते हैं लोग

कहते हैं लोग तारे आसमाँ पे होते हैं
मन में कोई खुद के झाँक के देखे
वहाँ भी असंख्य दिपदिपाते
सपनों से भरे सितारे होते हैं...

Wednesday, February 22, 2017

आज दिल मचल गया

बहुत दिनों से ब्लॉग की पुकार को अनसुना   कर रही थी पर  ..... आज आना ही पड़ा...... दिल के उदगार को 
व्यक्त करने। . 
          १.
अपनी अपनी डफली 
अपने अपने राग 
धूल भरी आँधी से प्रकृति 
खेल रही है फाग...... 

         २. 
पतझड़ के वियोग में 
प्रकृति हुई उदास 
नैनों में लिए प्रेम संदेशा 
आ गया पलाश,,,,,
  
        ३. 

राहें खिलखिला उठी 
ज्यों मंज़िल आई पास 
चेहरा वे चुराने लगे 
जो उड़ाते थे उपहास-----


         ४.

देखा है मैंने 
हवाओं को बलखाते 
आसमाँ के तारे 
यूँ हीं नहीं झिलमिलाते ---


        ५. 

बुझे -बुझे से क्यों हो दिल 
मन क्यों हो तुम उदास 
मिलना था जो मिल गया 
अब काहे का प्यास  ?

आज के लिए बस इतना ही मेरे गुप्त ब्लागर साथियों। वो भी सिर्फ इसीलिए की आज दिल मचल गया।