Thursday, January 24, 2019

सूरज लूट गया


विहँस रही है रजनी 

तारे चमक रहे 
रातरानी के सानिध्य में  
मौसम गमक रहे 
कलियाँ - कलियाँ झूम रही 
दिशायें मुस्कुराई 
आनंद के रथ पे हो सवार 
नाची पुरवाई 
आगोश में चाँदनी के 
तम दुबक गया 
चंदा की नगरी में  
सूरज लूट गया। 

बहुत दिनों के बाद आख़िरकार मौका निकाल  ही लिया  ..... 

Wednesday, September 20, 2017

बाबुल तेरे बिन

पल बदला घंटों में
घंटों से दिन 
ऐसा लगता सदियाँ बीती
बाबुल तेरे बिन .....
 मूरत वो  है नही 
ममत्व खिलखिला रहा
माली बदल गया पर
बाग लहलहा रहा ....
जीवन के हर मोड़ पे
याद आपकी आती है
प्रकृति के कण कण में
सूरत आपकी हीं नजर आती है
भूले बिसरे वक्त भर जाता 
खुशियाँ अपरम्पार
कौन भूला सकता है भला 
मातु -पिता का प्यार ?
दिन बदलता रातों में 
रातों में है दिन
जीना मैंने सीख लिया
बाबुल तेरे बिन ......सर्व पितृ अमावस पर मेरे दिल के भावों का अर्पण ---- उनके लिए जिन्होंने मुझे मेरे होने के मायने समझाए थे। 

Monday, April 3, 2017

कहते हैं लोग

कहते हैं लोग तारे आसमाँ पे होते हैं
मन में कोई खुद के झाँक के देखे
वहाँ भी असंख्य दिपदिपाते
सपनों से भरे सितारे होते हैं...

Wednesday, February 22, 2017

आज दिल मचल गया

बहुत दिनों से ब्लॉग की पुकार को अनसुना   कर रही थी पर  ..... आज आना ही पड़ा...... दिल के उदगार को 
व्यक्त करने। . 
          १.
अपनी अपनी डफली 
अपने अपने राग 
धूल भरी आँधी से प्रकृति 
खेल रही है फाग...... 

         २. 
पतझड़ के वियोग में 
प्रकृति हुई उदास 
नैनों में लिए प्रेम संदेशा 
आ गया पलाश,,,,,
  
        ३. 

राहें खिलखिला उठी 
ज्यों मंज़िल आई पास 
चेहरा वे चुराने लगे 
जो उड़ाते थे उपहास-----


         ४.

देखा है मैंने 
हवाओं को बलखाते 
आसमाँ के तारे 
यूँ हीं नहीं झिलमिलाते ---


        ५. 

बुझे -बुझे से क्यों हो दिल 
मन क्यों हो तुम उदास 
मिलना था जो मिल गया 
अब काहे का प्यास  ?

आज के लिए बस इतना ही मेरे गुप्त ब्लागर साथियों। वो भी सिर्फ इसीलिए की आज दिल मचल गया। 

                                                   
      



   


Sunday, February 21, 2016

कभी नहीं--- कभी नहीं---कभी नहीं

भूखों से आशा 
झूठों से दिलासा 
बहरों पे भरोसा 
कभी नहीं--- कभी नहीं---कभी नहीं। 
दुर्जनों से दोस्ती 
मनचलों से प्रीत
 गलत से समझौता 
कभी नहीं ---कभी नहीं ---कभी नहीं। 
खुद पर अविश्वास 
सच्चों पे शक 
गैरों पे हक़ 
कभी नहीं ---कभी नहीं --कभी नहीं। 
सौदागर से स्नेह 
शिकारी से यारी 
गुरु से होशियारी 
कभी नहीं ---कभी नहीं ---कभी नहीं। 
अतीत से आसक्ति 
वर्तमान की उपेक्षा 
भविष्य से भय 
कभी नहीं ---कभी नहीं ---कभी नहीं। 
 पर होता है न ?
   ब्लॉगर साथियों --कुछ जरुरी कार्यों की वजह से अभी ब्लॉग जगत 
से दूर हो गई हूँ --पर जल्द ही लौटूंगी। धन्यवाद। 

Thursday, December 3, 2015

उसे

खुश रहो आबाद रहो 
सदा कामना करुँगी 
तुम्हारी बददिमागी का 
सामना करुँगी ----


साज़िश कर जो चक्रव्यूह 
तुमने रचा ----उसे ---
अपने बुलंद इरादों से 
तोड़ दिया है ---


वो राह जो पहुँचती थी 
तुम तक --उसे मैंने 
कब का ----
छोड़ दिया है !
                 पद्मिनी टाइम्स में प्रकाशित मेरी एक रचना। 

Monday, October 12, 2015

बातें अनकही

अनिश्चित सफर के इस जीवन में 
 कुछ अनकही रह जाती है 
अपनों की अपनी सी बातें 
रह-रह कर तड़पाती है ----

चले गए जो पूरा कर 
अपने सारे काम 
पहुँचा देना प्रभू--- उन तक ---
मेरे प्यार का पैगाम 
जिनके  दिए संस्कारों से 
पथ अपना आलोकित करती हूँ 
यादों को उनके संग लिए 
हर पल आगे बढ़ती हूँ ---

मिलना बिछुड़ना
जन्म - मृत्यु 
जीवन की है रीत 
करती हूँ तहेदिल से बाबुल 
तुम्हें  श्रद्धा -सुमन अर्पित--- 
                                               सर्वपितृ अमावस पर माँ  और बाबूजी को समर्पित हैं  मेरे दिल के ये उदगार।