Sunday, February 21, 2016

कभी नहीं--- कभी नहीं---कभी नहीं

भूखों से आशा 
झूठों से दिलासा 
बहरों पे भरोसा 
कभी नहीं--- कभी नहीं---कभी नहीं। 
दुर्जनों से दोस्ती 
मनचलों से प्रीत
 गलत से समझौता 
कभी नहीं ---कभी नहीं ---कभी नहीं। 
खुद पर अविश्वास 
सच्चों पे शक 
गैरों पे हक़ 
कभी नहीं ---कभी नहीं --कभी नहीं। 
सौदागर से स्नेह 
शिकारी से यारी 
गुरु से होशियारी 
कभी नहीं ---कभी नहीं ---कभी नहीं। 
अतीत से आसक्ति 
वर्तमान की उपेक्षा 
भविष्य से भय 
कभी नहीं ---कभी नहीं ---कभी नहीं। 
 पर होता है न ?
   ब्लॉगर साथियों --कुछ जरुरी कार्यों की वजह से अभी ब्लॉग जगत 
से दूर हो गई हूँ --पर जल्द ही लौटूंगी। धन्यवाद। 

Thursday, December 3, 2015

उसे

खुश रहो आबाद रहो 
सदा कामना करुँगी 
तुम्हारी बददिमागी का 
सामना करुँगी ----


साज़िश कर जो चक्रव्यूह 
तुमने रचा ----उसे ---
अपने बुलंद इरादों से 
तोड़ दिया है ---


वो राह जो पहुँचती थी 
तुम तक --उसे मैंने 
कब का ----
छोड़ दिया है !
                 पद्मिनी टाइम्स में प्रकाशित मेरी एक रचना। 

Monday, October 12, 2015

बातें अनकही

अनिश्चित सफर के इस जीवन में 
 कुछ अनकही रह जाती है 
अपनों की अपनी सी बातें 
रह-रह कर तड़पाती है ----

चले गए जो पूरा कर 
अपने सारे काम 
पहुँचा देना प्रभू--- उन तक ---
मेरे प्यार का पैगाम 
जिनके  दिए संस्कारों से 
पथ अपना आलोकित करती हूँ 
यादों को उनके संग लिए 
हर पल आगे बढ़ती हूँ ---

मिलना बिछुड़ना
जन्म - मृत्यु 
जीवन की है रीत 
करती हूँ तहेदिल से बाबुल 
तुम्हें  श्रद्धा -सुमन अर्पित--- 
                                               सर्वपितृ अमावस पर माँ  और बाबूजी को समर्पित हैं  मेरे दिल के ये उदगार। 



Wednesday, September 30, 2015

मगर ---

सांध्यकालीन निशा ने 
अपनी धुन में मस्त 
निर्झरणी से पूछा ---- लोग आते हैं 
 डुबकी लगाते हैं  और 
चले जाते हैं ---
उनका ये कृत्य 
तुम्हारे दिल को नहीं दुखाता ?
होंठों पे मुस्कान लिए बोली निर्झरणी ---
जीवन में ख़ुशी औ गम 
आने-जाने वालों से ही मिलता है 
आवाजाही से हीं उनके 
मेरा तट भी संवरता है 
सच पूछो तो 
दोस्ती और रिश्तेदारी 
इन्हीं संबंधों का है  नाम 
मगर ---
नहीं सोचते लोग कि 
गलत कृत्यों का उनके 
क्या होगा अंजाम !
जब कोई अपनी हद से परे जाकर 
मेरे दिल को दुखाता  है 
तब --मैं  भी दिल पर पत्थर रख 
दिमाग को समझा लेती हूँ 
और ऐसे इंसान को 
बेहिचक डुबो  देती हूँ --
सुन निर्झरणी की बातें 
निशा  का दिल भर आया ----

जीवन के गूढ़ तत्वों का रहस्य 
प्रकृति ने उसे समझाया…         

Wednesday, September 9, 2015

खण्डहर वो

सहमा-सहमा रहता था वो 
तन्हा-तन्हा रहता था वो 
मुझसे कुछ-कुछ कहता था वो 
रात अमावस  की हो या 
निशा वो चाँद सितारों वाली 
स्वर्ण -रश्मियाँ करती थी 
अनवरत उसकी रखवाली 
मौसम अब खुशगवार हो गया 
खण्डहर वो आबाद हो गया ----

Saturday, August 8, 2015

झूमी हरियाली

जो अपनों का नहीं हुआ 
वो गैरों का क्या होगा 


जो खुद भूखा है 
वो औरों को क्या देगा -----

चेहरे पे मुस्कान लिए 
कलियाँ खिलखिलाई 
बदली संग बागों में 
झूमी हरियाली -----

Wednesday, June 24, 2015

छोटी-छोटी बातें

दुर्गम पथ के कठिन पलों में साथ न होगा कोय 
सोच समझ पथ चुनो मुसाफिर तृष्णा का अंत न होय। 

कृत्रिमता से दूर होकर चलें प्रकृति की ओर 
जो अपना खुद का हुआ नहीं वो औरों का क्या होय। 
  
विषाद में भी हर्ष है जीवन एक संघर्ष है 
संघर्षों से लड़ना है हर पल आगे बढ़ना है। 


दिल के रिश्ते अनजाने ही जुड़ जाते हैं 
खिलना हो फूलों को तो वीरानों में भी खिल जाते हैं। 


जीवन ख़ुशी और ग़मों का संगम है 
परिवर्तन प्रकृति का नियम है। 

दुविधाग्रस्त होना कमजोरी की निशानी है 
दो किनारों के बीच बहे तो नदी वरना … बहता हुआ पानी है। 


अतीत तूँ जा मैं  खुश हूँ अपने वर्तमान के साथ 
तेरी मेहरबानियों को मैं  भूल चुकी हूँ
 भविष्य की कल्पना में मैं डूब चुकी हूँ। 


दुःख और दर्द जिंदगी का हिस्सा है 
सृजन के पीड़ा का अनोखा ये हिस्सा है। 

वर्तमान , अतीत और भविष्य जब आपस में टकराता है 
दिल खिलता पर यादें रोती  है समय सहम तब जाता है। 

उड़ो जी भर खग पर अपने घोंसले को मत छोड़ना 
बात भले छोटी हो पर किसी के भरोसे को मत तोडना। 

मान भले  मत दो पर अपमान नहीं चाहिए 
ज्ञान दे दो मगर एहसान नहीं चाहिए। 

राह बदलते  हीं  राहगीर बदल जाते हैं 
उम्र के हर पड़ाव पे जैसे ख़्वाब बदल जाते है। .

  जिंदगी की इन छोटी-छोटी बातों में  बड़ी से बड़ी सच्चाइयाँ छिपी हैं.…  महसूस करके देखिये ....