Wednesday, July 24, 2013

यादों के फूल

जहाँ अपनापन रहता था कभी … 
वहाँ सूनापन बसने लगा है                                                       
वसंत के डाल पे हो सवार … 
पतझड़ कमर कसने लगा है …. 

सूना आँगन सूनी गली …. 
सूना हो गया मन … 
प्रियजन के बिछोह से  …
तरसे दोनों नयन … 

एक वक्त वो  था जब … 
 काँटे भी नहीं चुभते थे 
एक वक्त ऐसा भी आया 
जब फूलों ने लहुलहान किया …. 

घर (मायका)  के  कोने -कोने से 
बही प्रेम की पुरवाई …. 
बिछड़ गए जो जीवन-पथ पर 
उनपर यादों के फूल चढ़ा आई …


36 comments:

  1. घर (मायका) के कोने -कोने से
    बही प्रेम की पुरवाई ….
    बिछड़ गए जो जीवन-पथ पर
    उनपर यादों के फूल चढ़ा आई …


    बहुत सुंदर लिखा है,शुभकामनाये

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  2. yaado ko sajaya hai shabdo me aapne ................sundar..........

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  3. बहुत सुन्दर

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  4. सूना आँगन सूनी गली ….
    सूना हो गया मन …
    प्रियजन के बिछोह से …
    तरसे दोनों नयन …

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज बृहस्पतिवार (25-07-2013) को हौवा तो वामन है ( चर्चा - 1317 ) पर "मयंक का कोना" में भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति आज गुरुवार (25-07-2013) को "ब्लॉग प्रसारण- 66,सावन के बहारों के साथ" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

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  7. सार्थक प्रकटिकरण। कांटों का चुभना नहीं और फूलों से लहूलहान होना मनुष्य जीवन की विसंगति को बताता है। बस हमें ऐसे प्रसंगों में सब्र से काम लेना है और अपनी एकाग्रता को बनाए रखना है। परीक्षा की घडियों में ही हम अपने आप को परख सकते हैं और दुनिया को भी।

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  8. बिल्कुल सही सोच और सलाह है आपकी शिंदे साहब …. धन्यवाद आपके अमूल्य सुझाव के लिए …।

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  9. सुन्दर ,सटीक और सार्थक . बधाई
    सादर मदन .कभी यहाँ पर भी पधारें .
    http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

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  10. हर स्त्री आपके इन भावों को समझ सकती है .... बहुत भावपूर्ण

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  11. बिछड़ गए जो जीवन-पथ पर
    उनपर यादों के फूल चढ़ा आई …


    ...........बहुत सुंदर !!

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  12. एक वक्त वो था जब …
    काँटे भी नहीं चुभते थे
    एक वक्त ऐसा भी आया
    जब फूलों ने लहुलहान किया ….

    कभी कभी ऐसा समय आता है जब यादें सताती हैं बीते दिनों की ... ऐसे में हर चीज़ मन के भावों को उद्वेलित करती है ...

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  13. बहुत सुन्दर स्त्री मन का सटीक चित्रण ...आभार

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  14. सुंदर प्रस्तुति...

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  15. खूबसूरती से यादों को उकेरा आपने.

    रामराम.

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  16. बहुत ही भावपूर्ण प्रस्तुति … अच्छी लगी आपकी ये कविता
    regards

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  17. बहुत ही भावप्रवण प्रस्तुति ।

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  18. सुन्दर भावाभिव्यक्ति
    ..साभार

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  19. बहुत बेहद के अपनों से बिछड़ने का भाव पूर्ण शब्द संगम सलामत रहे तू जहां भी रहे तू। ॐ शान्ति।

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  21. आपकी भावपूर्ण रचना आँखों में आंसू ले आई बहुत सही....

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    1. betiyon ka dard saman hota hai ranjana jee ...

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  22. बहुत खूबसूरत और भावपूर्ण रचना, शानदार

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  23. बहुत सुन्दर मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति...

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  24. मर्मस्पर्शी ,भावप्रधान लेखन |
    जीवन पथ पर अनेको मिलेंगे ,
    तो कुछ के साथ छूट भी सकते हैं ....


    एक शाम संगम पर {नीति कथा -डॉ अजय }

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  25. बिछड़ गए जो जीवन-पथ पर
    उनपर यादों के फूल चढ़ा आई …

    वाह ..
    बधाई आपको !

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  26. भावपूर्ण रागात्मक ता के टूटने का विछोह इस रचना में मुखरित हुआ है।

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  27. एक वक्त वो था जब …
    काँटे भी नहीं चुभते थे
    एक वक्त ऐसा भी आया
    जब फूलों ने लहुलहान किया ….

    बहुत ही मर्मस्पर्शी , अंतस् से उपजी रचना....

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  28. एक वक्त वो था जब …
    काँटे भी नहीं चुभते थे
    एक वक्त ऐसा भी आया
    जब फूलों ने लहुलहान किया
    Bahut hi bhavpurn rachna.. sundar..

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  29. बहुत ही भावपूर्ण रचना..

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  30. सुन्दर सार्थक प्रस्तुति

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  31. सुंदर भावपूर्ण रचना
    बहुत बढिया

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