Thursday, January 30, 2014

गाती जाए सोन चिरैया-----

घर छोटा और गाड़ी छोटी पर ---
दिल बड़ा रखना भैया 
मेरे छत के मुंडेरे  पे 
गाती जाए  सोन चिरैया-----

कुर्ते गंदे और जूते गंदे पर ---

नीयत  साफ रखना भैया 
मेरे छत के मुंडेरे पे 
गाती जाए सोन चिरैया ---

संदूक  खाली और हाथ खाली पर ---

आँखें भरी(सपनों से) रखना भैया 
मेरे छत के मुंडेरे पे 
गाती जाए सोन चिरैया ---

मन पर बंधन  तन पर बंधन  पर ---
दिमाग स्वतंत्र रखना भैया 
मेरे छत के मुंडेरे पे 
गाती जाए सोन चिरैया ---

22 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (31-01-2014) को "कैसे नवअंकुर उपजाऊँ..?" (चर्चा मंच-1508) पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. धन्यवाद शास्त्री जी ..

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  2. बहुत सुन्दर ,दिल बड़ा होना चाहिए !
    सियासत “आप” की !
    नई पोस्ट मौसम (शीत काल )

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  3. सुन्दर गीत...
    :-)

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  4. बेहद खूबसूरत...

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  5. बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति

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  6. कल 02/02/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  7. संदूक खाली और हाथ खाली पर ---
    आँखें भरी(सपनों से) रखना भैया
    मेरे छत के मुंडेरे पे
    गाती जाए सोन चिरैया ---

    क्या बात है महाराणा निशा जी रूपक तत्व ने पंख पहन लिए हैं रचना। दिल साफ़ रखना भैया -खाब देखते रहना भैया।

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  8. सुन्दर और भावपूर्ण रचना |
    आशा

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  9. वाह !! बहुत सुंदर
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई ----

    आग्रह है--
    वाह !! बसंत--------

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  11. बहुत सुन्दर सघन भावबहुल अर्थ पूर्ण रचना है .शुक्रिया आपकी टिप्पणियों का .

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  12. आभार आदरणीय आपकी नेह्पूर्ण टिप्पणियों के लिए गाती जाए सोन चिरैया भाषिक सौंदर्य भाव गंगा लिए है .

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  13. बड़ी प्यारी रचना है निशा जी , बधाई ! काफी दिन से लिखा क्यों नहीं ?? शुभकामनायें !

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  14. सुंदर प्रस्तुति।।

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  15. bahut sunder ......prastuti

    visit here ...plz
    anandkriti
    anandkriti007.blogspot.com

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