Wednesday, April 1, 2015

अटूट सम्बन्ध है

अश्क और आहों का 
प्यार और बाँहों का 
मंज़िल और राहों का 

प्यास और तड़प का 
जीवन और संघर्ष का  
वचन और अनुबंध का 

शाम और सवेरा का 
प्रकाश और अँधेरा का 
साथ और सहारा का 

दोस्ती और साझेदारी का 
विश्वास और  जवाबदारी का
दिल और लाचारी का  

अटूट सम्बन्ध है। 

     इसे सिर्फ पढ़िए नहीं, महसूस करके  देखिये। पता चल जायेगा। 

10 comments:

  1. बहुत सुन्दर और सार्थक भाव...बहुत ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति...

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  2. हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार (03-04-2015) को "रह गई मन की मन मे" { चर्चा - 1937 } पर भी होगी!
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. सुंदर रचना।

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