बहुत दिनों से ब्लॉग की पुकार को अनसुना कर रही थी पर ..... आज आना ही पड़ा...... दिल के उदगार को
व्यक्त करने। .
१.
अपनी अपनी डफली
अपने अपने राग
धूल भरी आँधी से प्रकृति
खेल रही है फाग......
२.
पतझड़ के वियोग में
प्रकृति हुई उदास
नैनों में लिए प्रेम संदेशा
आ गया पलाश,,,,,
३.
राहें खिलखिला उठी
ज्यों मंज़िल आई पास
चेहरा वे चुराने लगे
जो उड़ाते थे उपहास-----
४.
देखा है मैंने
हवाओं को बलखाते
आसमाँ के तारे
यूँ हीं नहीं झिलमिलाते ---
५.
बुझे -बुझे से क्यों हो दिल
मन क्यों हो तुम उदास
मिलना था जो मिल गया
अब काहे का प्यास ?
आज के लिए बस इतना ही मेरे गुप्त ब्लागर साथियों। वो भी सिर्फ इसीलिए की आज दिल मचल गया।
व्यक्त करने। .
१.

अपने अपने राग
धूल भरी आँधी से प्रकृति
खेल रही है फाग......
२.
पतझड़ के वियोग में
प्रकृति हुई उदास
नैनों में लिए प्रेम संदेशा
आ गया पलाश,,,,,
३.
राहें खिलखिला उठी
ज्यों मंज़िल आई पास
चेहरा वे चुराने लगे
जो उड़ाते थे उपहास-----
४.
देखा है मैंने
हवाओं को बलखाते
आसमाँ के तारे
यूँ हीं नहीं झिलमिलाते ---
५.
बुझे -बुझे से क्यों हो दिल
मन क्यों हो तुम उदास
मिलना था जो मिल गया
अब काहे का प्यास ?
आज के लिए बस इतना ही मेरे गुप्त ब्लागर साथियों। वो भी सिर्फ इसीलिए की आज दिल मचल गया।
अब काहे की प्यास ....😊
ReplyDeleteब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "फ़ाइल ट्रांसफर - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !
ReplyDeleteधन्यवाद .....
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