Thursday, July 5, 2012

क्षणिकाएं


           ( 1)

छोटी सी इक बात पे
रोती हुई आँखें
हँसने लगी ....
      
       (2)
बाबुल का अँगना
महकते रहना 
दुआ करती हूँ ....

    (3)
दिल की दहलीज
सूनी है
कब आओगे ?
   (4)
सुख़ गई
शादाब बेलें
बारिश की अधिकता से ...

   (5)

सुनाया जो दुःख अपना
साँझ ने निशा से
वो शबनम के आँसू
रोती रही .....



(शादाब -हरी -भरी )
.

15 comments:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (07-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  2. बहुत ही अच्छी क्षणिकाए हैं ...
    शानदार ......

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  3. बहुत खूब! नज़र न लगे...आज एक अलग ही रंग में नज़र आ रही हैं।

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  4. नया रूप ...बहुत खूब

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  5. पहली बार क्षणिका नाम की विधा से परिचित हुआ हूँ....
    बेहद उम्दा....!!

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  6. बेहद उम्दा क्षणिकाएँ.

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  7. बहुत सुंदर
    अच्छी क्षणिकांए

    देखन में छोटन लगे
    घाव करे गंभीर..

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  8. निशा जी बहुत सुन्दर क्षणिकाएं बन पड़ी हैं ...
    सुने जो दुःख अपना सांझ ने निशा से .....
    वो शबनम के आंसू ...रोती रही
    भ्रमर ५
    भ्रमर का दर्द और दर्पण

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  9. बहुत बहुत शुक्रिया द्रुत टिपण्णी के लिए .स्वागतेय , पहल आपकी .बहुत बढ़िया है यह भाव कणिका आपकी .
    भाव कणिकाओं में जान है ,पहचान है आपकी .

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  10. बहुत बहुत शुक्रिया द्रुत टिपण्णी के लिए .स्वागतेय , पहल आपकी .बहुत बढ़िया है यह भाव कणिका आपकी .
    भाव कणिकाओं में जान है ,पहचान है आपकी .

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  11. वाह.....
    बहुत सुन्दर निशा जी....
    मानों माला के मोती बिखरे हो पन्ने पर...

    सस्नेह
    अनु

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  12. सुनाया जो दुःख अपना
    साँझ ने निशा से
    वो शबनम के आँसू
    रोती रही ..... वाह....वाह....

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