Friday, August 31, 2012

दिल के रिश्ते

दिल के रिश्ते ........
अनजाने ही जुड़ जाते हैं
खिलना हो फूलों को तो ?????
वो वीरानों में भी खिल जातें हैं
फूल बनना है तो बनो कमल का
जलकुम्भी का नहीं .....
कमल के फूलों से
जल और तालाब की
शोभा बढ़ जाती है
जलकुम्भी के फूलों से
जल और तालाब की
पहचान ही मिट जाती है ....

16 comments:

  1. दिल के रिश्ते ........
    अनजाने ही जुड़ जाते हैं ..nisha ji sahi kaha aapne sach me dil ke riste anjane hi jud jate hai .......sundar rachna aapki

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  2. bilkul sahi kaha aapne dil ke riste anjane hi jud jate hai

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  3. बहुत ख़ूब!

    एक लम्बे अंतराल के बाद कृपया इसे भी देखें-

    जमाने के नख़रे उठाया करो

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  4. सच कहा है ... जलना है तो रोशन करो बर्बाद नहीं ... सुन्दर रचना ...

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  5. जलकुम्भी के फूलों से
    जल और तालाब की
    पहचान ही मिट जाती है ....

    I AM GREAT FAN OF YOU. YOU ARE ALWAYS SO NICE SO BEAUTIFUL BY AALL MEANS THOUGHT FEELINGS .

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  6. बहुत सुंदर। मेरे नए पोस्ट पर आपका हार्दिक अभिनंदन है।

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  7. अरे बहन जलकुम्भी का इतना अनादर मत कीजिए ,अकेली दवा है ये जो थायरायड के पेशेंट के लिए अमृत है.

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    1. mujhe jalkumbhi ka phool bahut pasand hai kahi bhi ye dikhta hai to bas use dekhte rahne ki iccha hoti hai ....medicinal use bhi hai iska par sacchaai to yahi hai ki ye jal aur talab dono ko dhak leta hai ......hai na ....anadar nahi kar rahi hoon sacchai bta rahi hoon ....

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  8. आपके सानिध्य से दूसरे का व्यक्तितिव' और निखरता है ....तब तो जीना सफल हुआ ...बड़ी सहजता से बहुत बड़ी बात कहदी ...वाह निशा जी

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  9. दिल के रिश्ते ........
    अनजाने ही जुड़ जाते हैं

    sahi kaha aapne,khubsurat,
    kabhi mere blog me bhi aiye link: http://kpk-vichar.blogspot.in

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  10. चलिए आपकी कविता के माध्यम से ये तो पता चला जलकुम्भी से थायरायड का इलाज होता है ....:))

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  11. दिल का रिश्ता अनजाने ही जुड़ जाता है...
    एकदम सही...
    बहुत सुन्दर,प्यारी रचना...
    :-)

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