Friday, October 5, 2012

वक्त -वक्त की बात

वक्त -वक्त की बात है
कोई मुस्कुराता है
आसमां  पे जब भी
चाँद नज़र आता है .......

23 comments:

  1. मुझे लगता है,हर कोई मुस्कुराता है....
    चाँद पर सभी को प्यार जो आता है...
    :-)

    अनु

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    1. यहीं तो मात खा गईं अनु जी ...
      सबका चाँद अलग-अलग होता है ..
      और वो चाँद हमेशा नहीं दीखता भई...:

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  2. सुन्दर हाइकू |निशा जी सुनहरी कलम पर आने हेतु आपका बहुत -बहुत आभार |

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  3. क्त -वक्त की बात है
    कोई मुस्कुराता है
    आसमां पे जब भी
    चाँद नज़र आता है .......
    बहुत खूब ! कोई पगलाता भी है ,जैसे समुन्दर !

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    1. बिलकुल सही बात कही आपने विभा जी .....ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद ..
      बहुत दिनों के बाद बिहारी कमेंट्स मिला पढने को बहुत अच्छा लगा ...आते रहिये अपनापन लगा ....आप पटना की हैं ..मै भागलपुर से हूँ ...

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  4. आपकी रचना को समर्पित

    मुस्कुराने के लिए गर चाँद ही काफी रहे
    तो विरह में प्रेयसी क्यूँ कहीं व्याकुल फिरे ..

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    1. धन्यवाद सिंह साहब ..बहुत अच्छी और सटीक पंक्ति ..लेकिन कभी-कभी चाँद
      का दीदार ही काफी होता है ..दिल की तसल्ली के लिए .....विभा जी का कमेंट्स काफी है समझने के लिए ...

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  5. वाह ... बहुत ही बढिया।

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  6. sach kaha nisha ji ...vaise chand se sabhi ko pyar hai .........man ko mahakata hai

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    1. sahi kaha shashi jee ...chand pr sabko pyaar aata hai....par chand kabhi.kabhi dikhta hai....

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (07-10-2012) के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

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    1. BAHUT-BAHUT DHANYAVAD ND AABHAR SHASTRI JEE...

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  8. चार पंक्तियों में ही पूरी बात
    बहुत सुंदर

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  9. बढ़िया भाव कणिका .प्रकृति पर आरोपण अपने सुख का अनुभूति का .अन्दर अंदर लड्डू फूटने का .

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  10. बहुत अच्छी तरीके से आपने बताया कि

    चाँद
    आज क्यों मुस्कुरा रहा है
    आस्माँ पर शायद
    किसीने अपनी
    खुशी बाँटी है
    उसके साथ।

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

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  11. बहुत सुंदर मुक्तक!!!!!

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