Monday, October 29, 2012

ओ शरद के चाँद

 
ओ शरद के चाँद
तुझ में खोकर
आज तन्हाई भी मौन है
बता दे मुझको ......
हंसती हुई चांदनी की ...
उदासी का सबब कौन है ?
 

30 comments:

  1. वाह...
    बहुत सुन्दर...

    अनु

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  2. Good Sharad ke chand ki khubsurti ka raj bata diya

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    1. bahut accha vishleshan kiya mittal sahab ....

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  3. बहुत सुन्दर रचना...
    :-)

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  4. चाँद और चांदनी का प्रभाव हमारी मन:स्थिति पर निर्भर करता है...सुन्दर अति-सुंदर...

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  5. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 31/10/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  6. इस प्रश्न का उत्तर दे कौन?
    हर तरफ़ है उदासी और
    एक पसरा हुआ मौन!

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  7. वाह ... क्‍या बात है

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  8. सुन्दर रचना पूर्णिमा के चाँद जैसी शफ्फाक

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  9. हंसती हुई चांदनी की ...
    उदासी का सबब कौन है ?

    वाह ...

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  10. Replies
    1. are waah ye to maine socha hi nahi tha ...par ye bhi ho sakta hai .....thanks .....badi gahree soch hai surendra jee aapki ....jisne mujhe bada prabhawit kiya ...

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  11. बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति .पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब,बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये. मधुर भाव लिये भावुक करती रचना,,,,,,

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    1. dhanyavad madan jee aape motivation ke liye...

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