Wednesday, April 17, 2013

इसीलिए ..निशा ......

पिताजी ने सिखलाया था कि .....गर ...

राह के काँटे तन और मन को ..लहुलहान ..करने लगे ..तो  ?
राह बदल लेना 
सामने के नज़ारे ..
दिल को दहलाने लगे ..तो…?
आँखें मूंद लेना ...

मित्रता में अगर .....
समानता  न हो 
समभाव न हो 
मैत्रीभाव न हो ..तो ..?

ऐसी मित्रता को छोड़ देना ..क्योंकि ..

मंजिल स्पष्ट है तो रास्ते  मिल हीं जायेंगे 
आँखें हैं तो नज़ारे भी दिख जायेंगे 
जिंदगी रहेगी तो ...?
मित्र भी बन जायेंगे ....किंतु .....

खुद की नज़रों से गिरकर ..
कैसे जी पाओगी ?

इसीलिए ..निशा ......

जिन्दगी में हर फैसला 
सोच -समझ कर करना 

खुद की नज़रों में गिर जाओ 
ऐसा काम कभी नहीं करना .....

27 comments:

  1. सुन्दर भावपूर्ण कविता |आभार निशा जी |

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  2. आपकी यह प्रस्तुति कल के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें

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  3. बहुत अच्छी रचना ...आभार.

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  4. बहुत सुन्दर रचना | आभार

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  5. डॉ.निशा जी पिताजी के प्रति आपका आदर भाव कविता में प्रकट हो रहा है। हमेशा पिता का लगाव बेटी के प्रति ज्यादा और बेटी का पिता के प्रति रहता है। पिता का बेटी के साथ सलाह-मशवीरा करना और कहना कि मूल अर्थ में 'खुद की नजरों में उठ जाओ ऐसा काम करते रहना।' उत्कृष्ट।
    तस्वीर से भी व्यक्ति के भाव प्रकट होते हैं। पिताजी में कानून, प्रेम, संवेदना, परिवार के प्रति जिम्मेदारी... का एहसास कुट-कुट भरा है।

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  6. अरे वाह! बहुत सुन्दर निशा जी!

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  7. जिन्दगी में हर फैसला
    सोच -समझ कर करना
    खुद की नज़रों में गिर जाओ
    ऐसा काम कभी नहीं करना

    बहुत सुन्दर....बेहतरीन प्रस्तुति निशा जी!!
    पधारें बेटियाँ ...

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  8. बहुत सुन्दर सकारात्मक सीख!

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  9. बहुत सुन्दर। बधाई!
    Please visit-
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  10. बेहतरीन सीख देती रचना

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  11. पापा की अमूल्‍य सीख..

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  12. बिलकुल सच्ची बात.

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  13. खुद की नज़रों से गिरकर ..

    कैसे जी पाओगी ....
    वाह , बहुत लाजवाब सीख

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  14. देवी सिद्धिदात्री माता -दिवस की वधाई !
    अच्छी मोविश्लेषक रचना \ बहुत खूब !!

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  15. Sakaratmak soch,...
    Seekh deti rachna

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  16. खुद की नज़रों में गिर जाओ
    ऐसा काम कभी नहीं करना ....
    पिता कभी भी गलत हो ही नहीं
    सही सीख

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  17. मंजिल स्पष्ट है तो रास्ते मिल हीं जायेंगे
    आँखें हैं तो नज़ारे भी दिख जायेंगे

    बहुत सुन्दर

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