Monday, April 3, 2017
Wednesday, February 22, 2017
आज दिल मचल गया
बहुत दिनों से ब्लॉग की पुकार को अनसुना कर रही थी पर ..... आज आना ही पड़ा...... दिल के उदगार को
व्यक्त करने। .
१.
अपनी अपनी डफली
अपने अपने राग
धूल भरी आँधी से प्रकृति
खेल रही है फाग......
२.
पतझड़ के वियोग में
प्रकृति हुई उदास
नैनों में लिए प्रेम संदेशा
आ गया पलाश,,,,,
३.
राहें खिलखिला उठी
ज्यों मंज़िल आई पास
चेहरा वे चुराने लगे
जो उड़ाते थे उपहास-----
४.
देखा है मैंने
हवाओं को बलखाते
आसमाँ के तारे
यूँ हीं नहीं झिलमिलाते ---
५.
बुझे -बुझे से क्यों हो दिल
मन क्यों हो तुम उदास
मिलना था जो मिल गया
अब काहे का प्यास ?
आज के लिए बस इतना ही मेरे गुप्त ब्लागर साथियों। वो भी सिर्फ इसीलिए की आज दिल मचल गया।
व्यक्त करने। .
१.
अपनी अपनी डफली अपने अपने राग
धूल भरी आँधी से प्रकृति
खेल रही है फाग......
२.
पतझड़ के वियोग में
प्रकृति हुई उदास
नैनों में लिए प्रेम संदेशा
आ गया पलाश,,,,,
३.
राहें खिलखिला उठी
ज्यों मंज़िल आई पास
चेहरा वे चुराने लगे
जो उड़ाते थे उपहास-----
४.
देखा है मैंने
हवाओं को बलखाते
आसमाँ के तारे
यूँ हीं नहीं झिलमिलाते ---
५.
बुझे -बुझे से क्यों हो दिल
मन क्यों हो तुम उदास
मिलना था जो मिल गया
अब काहे का प्यास ?
आज के लिए बस इतना ही मेरे गुप्त ब्लागर साथियों। वो भी सिर्फ इसीलिए की आज दिल मचल गया।
Sunday, February 21, 2016
कभी नहीं--- कभी नहीं---कभी नहीं
भूखों से आशा झूठों से दिलासा
बहरों पे भरोसा
कभी नहीं--- कभी नहीं---कभी नहीं।
दुर्जनों से दोस्ती
मनचलों से प्रीत
गलत से समझौता
कभी नहीं ---कभी नहीं ---कभी नहीं।
खुद पर अविश्वास
सच्चों पे शक
गैरों पे हक़
कभी नहीं ---कभी नहीं --कभी नहीं।
सौदागर से स्नेह
शिकारी से यारी
गुरु से होशियारी
कभी नहीं ---कभी नहीं ---कभी नहीं।
अतीत से आसक्ति
वर्तमान की उपेक्षा
भविष्य से भय
कभी नहीं ---कभी नहीं ---कभी नहीं।
पर होता है न ?
ब्लॉगर साथियों --कुछ जरुरी कार्यों की वजह से अभी ब्लॉग जगत
से दूर हो गई हूँ --पर जल्द ही लौटूंगी। धन्यवाद।
Thursday, December 3, 2015
Monday, October 12, 2015
बातें अनकही
अनिश्चित सफर के इस जीवन में कुछ अनकही रह जाती है
अपनों की अपनी सी बातें
रह-रह कर तड़पाती है ----
चले गए जो पूरा कर
अपने सारे काम
पहुँचा देना प्रभू--- उन तक ---
मेरे प्यार का पैगाम
जिनके दिए संस्कारों से
पथ अपना आलोकित करती हूँ
यादों को उनके संग लिए
हर पल आगे बढ़ती हूँ ---
मिलना बिछुड़ना
जन्म - मृत्यु
जीवन की है रीत
करती हूँ तहेदिल से बाबुल
तुम्हें श्रद्धा -सुमन अर्पित---
सर्वपितृ अमावस पर माँ और बाबूजी को समर्पित हैं मेरे दिल के ये उदगार।
Wednesday, September 30, 2015
मगर ---
सांध्यकालीन निशा ने
अपनी धुन में मस्त
निर्झरणी से पूछा ---- लोग आते हैं
डुबकी लगाते हैं और
चले जाते हैं ---
उनका ये कृत्य
तुम्हारे दिल को नहीं दुखाता ?
होंठों पे मुस्कान लिए बोली निर्झरणी ---
जीवन में ख़ुशी औ गम
आने-जाने वालों से ही मिलता है
आवाजाही से हीं उनके
मेरा तट भी संवरता है
सच पूछो तो
दोस्ती और रिश्तेदारी
इन्हीं संबंधों का है नाम
मगर ---
नहीं सोचते लोग कि
गलत कृत्यों का उनके
क्या होगा अंजाम !
जब कोई अपनी हद से परे जाकर
मेरे दिल को दुखाता है
तब --मैं भी दिल पर पत्थर रख
दिमाग को समझा लेती हूँ
और ऐसे इंसान को
बेहिचक डुबो देती हूँ --
सुन निर्झरणी की बातें
निशा का दिल भर आया ----
जीवन के गूढ़ तत्वों का रहस्य
प्रकृति ने उसे समझाया…
Wednesday, September 9, 2015
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