Wednesday, September 30, 2015

मगर ---

सांध्यकालीन निशा ने 
अपनी धुन में मस्त 
निर्झरणी से पूछा ---- लोग आते हैं 
 डुबकी लगाते हैं  और 
चले जाते हैं ---
उनका ये कृत्य 
तुम्हारे दिल को नहीं दुखाता ?
होंठों पे मुस्कान लिए बोली निर्झरणी ---
जीवन में ख़ुशी औ गम 
आने-जाने वालों से ही मिलता है 
आवाजाही से हीं उनके 
मेरा तट भी संवरता है 
सच पूछो तो 
दोस्ती और रिश्तेदारी 
इन्हीं संबंधों का है  नाम 
मगर ---
नहीं सोचते लोग कि 
गलत कृत्यों का उनके 
क्या होगा अंजाम !
जब कोई अपनी हद से परे जाकर 
मेरे दिल को दुखाता  है 
तब --मैं  भी दिल पर पत्थर रख 
दिमाग को समझा लेती हूँ 
और ऐसे इंसान को 
बेहिचक डुबो  देती हूँ --
सुन निर्झरणी की बातें 
निशा  का दिल भर आया ----

जीवन के गूढ़ तत्वों का रहस्य 
प्रकृति ने उसे समझाया…         

Wednesday, September 9, 2015

खण्डहर वो

सहमा-सहमा रहता था वो 
तन्हा-तन्हा रहता था वो 
मुझसे कुछ-कुछ कहता था वो 
रात अमावस  की हो या 
निशा वो चाँद सितारों वाली 
स्वर्ण -रश्मियाँ करती थी 
अनवरत उसकी रखवाली 
मौसम अब खुशगवार हो गया 
खण्डहर वो आबाद हो गया ----

Saturday, August 8, 2015

झूमी हरियाली

जो अपनों का नहीं हुआ 
वो गैरों का क्या होगा 


जो खुद भूखा है 
वो औरों को क्या देगा -----

चेहरे पे मुस्कान लिए 
कलियाँ खिलखिलाई 
बदली संग बागों में 
झूमी हरियाली -----

Wednesday, June 24, 2015

छोटी-छोटी बातें

दुर्गम पथ के कठिन पलों में साथ न होगा कोय 
सोच समझ पथ चुनो मुसाफिर तृष्णा का अंत न होय। 

कृत्रिमता से दूर होकर चलें प्रकृति की ओर 
जो अपना खुद का हुआ नहीं वो औरों का क्या होय। 
  
विषाद में भी हर्ष है जीवन एक संघर्ष है 
संघर्षों से लड़ना है हर पल आगे बढ़ना है। 


दिल के रिश्ते अनजाने ही जुड़ जाते हैं 
खिलना हो फूलों को तो वीरानों में भी खिल जाते हैं। 


जीवन ख़ुशी और ग़मों का संगम है 
परिवर्तन प्रकृति का नियम है। 

दुविधाग्रस्त होना कमजोरी की निशानी है 
दो किनारों के बीच बहे तो नदी वरना … बहता हुआ पानी है। 


अतीत तूँ जा मैं  खुश हूँ अपने वर्तमान के साथ 
तेरी मेहरबानियों को मैं  भूल चुकी हूँ
 भविष्य की कल्पना में मैं डूब चुकी हूँ। 


दुःख और दर्द जिंदगी का हिस्सा है 
सृजन के पीड़ा का अनोखा ये हिस्सा है। 

वर्तमान , अतीत और भविष्य जब आपस में टकराता है 
दिल खिलता पर यादें रोती  है समय सहम तब जाता है। 

उड़ो जी भर खग पर अपने घोंसले को मत छोड़ना 
बात भले छोटी हो पर किसी के भरोसे को मत तोडना। 

मान भले  मत दो पर अपमान नहीं चाहिए 
ज्ञान दे दो मगर एहसान नहीं चाहिए। 

राह बदलते  हीं  राहगीर बदल जाते हैं 
उम्र के हर पड़ाव पे जैसे ख़्वाब बदल जाते है। .

  जिंदगी की इन छोटी-छोटी बातों में  बड़ी से बड़ी सच्चाइयाँ छिपी हैं.…  महसूस करके देखिये .... 



Sunday, May 10, 2015

पता नहीं क्यों ----माँ -----

सच कहूँ माँ..... 
मुझे तुम्हारी नहीं 
तुम्हारी उन बातों कि  याद आती है 
जब मुझे रुलानेवाले से तुम 
हमेशा कुपित हो जाती थीं  
बड़े प्यार से --मान --मनुहार से 
मनपसंद खाना  खिलाती थी 
जब किसी वजह से मैं 
खुद से हीं रूठ जाती थी 
मेरे सपने , मेरी खुशियाँ थे 
तेरे जीवन के आधार 
मनोयोग से करती थीं 
उन सपनों को साकार 
                                  तेरे बिन ------
                                                जीवन के इस धूप -छाँह में 
                                               संघर्षों के सबल बाँह में 
                                            जब अनायास मुस्कुराती हूँ 
                                                                          उसी समय 
पता नहीं क्यों ----माँ -----
तुम बहुत --बहुत ---बहुत --बहुत याद आती हो।  
                                              सभी माँओं को समर्पित है मेरे दिल के ये उदगार । माँ अपनी बेटियों को सिर्फ आत्म विश्वास रूपी पंख दे --जीवन का जंग वो खुद ही जीत लेगी। 

Wednesday, April 1, 2015

अटूट सम्बन्ध है

अश्क और आहों का 
प्यार और बाँहों का 
मंज़िल और राहों का 

प्यास और तड़प का 
जीवन और संघर्ष का  
वचन और अनुबंध का 

शाम और सवेरा का 
प्रकाश और अँधेरा का 
साथ और सहारा का 

दोस्ती और साझेदारी का 
विश्वास और  जवाबदारी का
दिल और लाचारी का  

अटूट सम्बन्ध है। 

     इसे सिर्फ पढ़िए नहीं, महसूस करके  देखिये। पता चल जायेगा। 

Wednesday, March 25, 2015

हर पल

विषाद है तो हर्ष है 
जीवन एक संघर्ष है 
संघर्षों से नहीं डरना है 
हर पल आगे बढ़ना है।